बुजुर्ग की मदद करने पर नौकरी चली गई… लेकिन अगली सुबह जो हुआ, उसे देखकर सब रह गए इंसानियत की मिसाल दिल्ली का एक मॉल शाम के करीब 7:00 बजे थे। भीड़ थोड़ी कम हो चुकी थी, लेकिन ग्रोसरी सेक्शन के काउंटर नंबर चार पर अब भी कुछ ग्राहक लाइन में खड़े थे। उस काउंटर पर खड़ी थी संध्या। उम्र करीब 22 साल। वह एक मध्यमवर्गीय परिवार से थी और पढ़ाई के साथ-साथ नौकरी कर रही थी ताकि घर की जरूरतों में हाथ बटा सके। उसकी आंखों में थकान जरूर थी, लेकिन व्यवहार में शालीनता और चेहरे पर हल्की सी मुस्कान हमेशा बनी रहती थी। तभी एक बुजुर्ग व्यक्ति धीरे-धीरे काउंटर के पास पहुंचे। उनकी उम्र करीब 75 साल थी, कमर झुकी हुई थी, हाथों में कंपन था और आंखों में झिझक। उन्होंने अपने छोटे से थैले में से कुछ सामान निकाला—दो ब्रेड, एक दूध का पैकेट, कुछ दवाइयां और एक साबुन। उन्होंने धीरे-धीरे सामान बेल्ट पर रखा और फिर जेब से एक पुराना सा बटुआ निकाला। संध्या ने स्कैन करना शुरू किया। कुल ₹214 हुए, दादा जी। बुजुर्ग ने कांपते हाथों से कुछ नोट निकाले। ₹200 ही थे। बाकी बटुए में सिक्कों के अलावा कुछ नहीं था। उन्होंने घबराकर कहा, “बिटिया, बस ...
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